मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के संकल्प संख्या- 1717 एवं 1751, दिनांक- 15/22 दिसम्बर, 2010 द्वारा सुशासन के कार्यक्रम (2010-15) निरूपित किये गये हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री बिहार श्री नीतीश कुमार ने कृषि में इन्द्रधनुषी क्रांति लाने के उद्देश्य से कृषि के समग्र विकास हेतु राज्य सरकार ने कार्यपालिका नियमावली के नियम 2( ख) के तहत एक मंत्रिपरिषदीय समिति ( कृषि कैबिनेट) के गठन का निर्णय लिया।
इस प्रकार राज्य में पहली बार माननीय मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में 14 अप्रैल, 2011 को कृषि के समग्र विकास के लिए कृषि संबंधी मंत्रिपरिषदीय समिति यानि कृषि कैबिनेट का गठन किया गया, जिसमें कृषि विभाग सहित कृषि से संबद्ध 17 विभाग यथा वित्त विभाग, जल संसाधन विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, पंचायती राज विभाग, उद्योग विभाग, योजना एवं विकास विभाग, सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग, खाध एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, गन्ना उद्योग विभाग, लधु जल संसाधन विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, सहकारिता विभाग, पर्यावरण एवं वन विभाग, तथा ऊर्जा विभाग को शामिल किया गया। उक्त 17 विभागों के माननीय मंत्री कृषि कैबिनेट के सदस्य हैं। कृषि कैबिनेट के बैठकों में राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष तथा माननीय मुख्यमंत्री जी के कृषि सलाहकार विशेष आमंत्रित के रूप में भाग लेते हैं तथा मुख्य सचिव इस कैबिनेट के सचिव हैं। इनके अतिरिक्त राज्य के विकास आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त, संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/ सचिव भी कृषि कैबिनेट की बैठक में भाग लेते हैं। कृषि कैबिनेट की प्रथम बैठक दिनांक 26.04.2011 को आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2012 से 2022 तक के लिए कृषि रोड मैप तैयार करने हेतु 14 समितियों का गठन किया गया। बाद में कृषि कैबिनेट में आपदा प्रबंधन विभाग तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग को भी शामिल कर लिया गया। इसप्रकार वर्तमान में कृषि कैबिनेट में कुल 19 विभाग सम्मिलित हैं। वर्तमान रोड मैप की अवधि 31 मार्च, 2012 को समाप्त हो जायेगी। इसके मद्देनजर वर्ष 2012-2017 के लिए सभी विभागों की योजनाओं को सम्मिलित करते हुए एक योजना प्रारूप कृषि रोड मैप बनाया गया है। इसमें 2018-22 के लिए कृषि विकास हेतु विज़न भी सम्मिलित है। राज्य सरकार को अगले 05 वर्षों के लिए योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु एक लाख 52 हजार 511 करोड़ रू. की आवश्यकता होगी।
प्रथम कृषि कैबिनेट की बैठक के पश्चात कृषि कैबिनेट की चार बैठकें दिनांक 12.08.2011, 06.11.2011, 20.12.2011 एवं 03.01.2012 को सम्पन्न हुई जिसमें प्रथम बैठक के बाद गठित 14 समितियों के प्रतिवेदनों पर विचार किया गया। दिनांक 03.01.2012 को आयोजित बैठक में कृषि संबंधी मंत्रिपरिषदीय समिति ( कृषि कैबिनेट) में निर्णय लिया गया कि विभिन्न समितियों के द्वारा तैयार किये गये प्रतिवेदन पर राज्य के किसानों का मंतव्य लिया जाय। इस उद्देश्य से दिनांक 04 फरवरी, 2012 को श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल, पटना में एक किसान समागम का आयोजन किया गया। इस समागम में अगले पाँच वर्षों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए तैयार किए गए रोड मैप तथा योजनाओं पर राज्य के किसानों के साथ परिचर्चा की गयी एवं उनके विचार प्राप्त किए गए।
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